गोत्र सूची (Gotra list)
बायोडाटा के “कुंडली विवरण” में गोत्र लिखा जाता है। यहाँ प्रचलित ऋषि-गोत्र हिन्दी और English दोनों में हैं, ताकि आप सही वर्तनी लिख सकें।
गोत्र हर समुदाय में अलग-अलग होते हैं और यह सूची पूरी नहीं है। अपने परिवार के बड़ों से पुष्टि ज़रूर करें।
सप्तऋषि और प्रचलित ऋषि-गोत्र
सप्तऋषि: कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज। कई सूचियों में अगस्त्य को आठवाँ गोत्र-ऋषि माना जाता है।
| गोत्र | English | परंपरा / टिप्पणी |
|---|---|---|
| अगस्त्य | Agastya | ऋषि अगस्त्य; कई सूचियों में आठवाँ ऋषि-गोत्र |
| अंगिरस | Angiras | ऋषि अंगिरा |
| अत्रि | Atri | सप्तऋषि |
| आत्रेय | Atreya | अत्रि ऋषि की परंपरा |
| भारद्वाज | Bharadwaj | सप्तऋषि |
| भार्गव | Bhargava | भृगु ऋषि की परंपरा |
| भृगु | Bhrigu | ऋषि भृगु |
| धनंजय | Dhananjaya | ऋषि-गोत्र |
| गर्ग | Garg | ऋषि गर्ग; अग्रवाल समाज के 18 गोत्रों में भी |
| गौतम | Gautam | सप्तऋषि |
| हरित | Harita | ऋषि हारीत |
| जमदग्नि | Jamadagni | सप्तऋषि |
| कपिल | Kapil | ऋषि कपिल |
| कण्व | Kanva | ऋषि कण्व |
| कश्यप | Kashyap | सप्तऋषि; परंपरा में जिनका गोत्र ज्ञात न हो वे अक्सर कश्यप मानते हैं |
| कात्यायन | Katyayan | ऋषि कात्यायन |
| कौंडिन्य | Kaundinya | ऋषि कौंडिन्य |
| कौशिक | Kaushik | विश्वामित्र ऋषि की परंपरा |
| कुत्स | Kutsa | अंगिरस परंपरा |
| मांडव्य | Mandavya | ऋषि मांडव्य |
| मौद्गल्य / मुद्गल | Maudgalya / Mudgal | ऋषि मुद्गल |
| पराशर | Parashar | वशिष्ठ परंपरा |
| पुलस्त्य | Pulastya | ऋषि पुलस्त्य |
| सांकृत्य | Sankritya | ऋषि-गोत्र |
| शांडिल्य | Shandilya | ऋषि शांडिल्य |
| शौनक | Shaunak | भृगु परंपरा |
| उपमन्यु | Upamanyu | वशिष्ठ परंपरा |
| वशिष्ठ | Vashishtha | सप्तऋषि |
| वत्स / श्रीवत्स | Vatsa / Shrivatsa | भृगु परंपरा |
| विश्वामित्र | Vishvamitra | सप्तऋषि |
अग्रवाल समाज के 18 गोत्र
परंपरा के अनुसार महाराजा अग्रसेन से जुड़े अग्रवाल समाज के 18 गोत्र:
ऐरन (Airan) · बंसल (Bansal) · बिंदल (Bindal) · भंदल (Bhandal) · धारण (Dharan) · गर्ग (Garg) · गोयल (Goyal) · गोयन (Goyan) · जिंदल (Jindal) · कंसल (Kansal) · कुच्छल (Kuchhal) · मधुकुल (Madhukul) · मंगल (Mangal) · मित्तल (Mittal) · नांगल (Nangal) · सिंघल (Singhal) · तायल (Tayal) · तिंगल (Tingal)
गोत्र: सवाल-जवाब
गोत्र क्या होता है?
गोत्र पिता की ओर से चली आ रही वंश-परंपरा का नाम है, जो किसी प्राचीन ऋषि या मूल पुरुष से जुड़ा माना जाता है। हिन्दू परिवारों में यह पीढ़ी दर पीढ़ी पिता से संतान को मिलता है।
एक ही गोत्र में शादी क्यों नहीं करते?
परंपरा में एक गोत्र के लोगों को एक ही वंश का माना जाता है, इसलिए कई समुदाय “सगोत्र” विवाह से बचते हैं। कई परिवार माँ के गोत्र (और कहीं-कहीं दादी, नानी के गोत्र) को भी देखते हैं।
क्या सगोत्र विवाह कानूनन मना है?
नहीं। हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 एक ही गोत्र में विवाह को मना नहीं करता; कानूनी रोक “सपिंड” और निषिद्ध रिश्तों पर है। गोत्र देखना सामाजिक और धार्मिक परंपरा है।
मुझे अपना गोत्र नहीं पता, क्या करूँ?
परिवार के बड़ों या कुल-पुरोहित से पूछें; पुरानी पूजा या विवाह की पत्रिकाओं में भी लिखा मिलता है। परंपरा में जिनका गोत्र ज्ञात नहीं होता, वे अक्सर कश्यप गोत्र मानते हैं।