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बायोडाटा में परिवार की जानकारी कैसे लिखें

पिता, माता, भाई-बहन, मामा, परिवार का प्रकार और मूल निवास — शादी के बायोडाटा में पारिवारिक विवरण लिखने का सही तरीका, हर स्थिति के उदाहरण के साथ।

अरेंज मैरिज में "पारिवारिक विवरण" उतने ही ध्यान से पढ़ा जाता है जितना लड़के या लड़की का अपना विवरण। सामने वाला परिवार जानना चाहता है कि घर में कौन-कौन है, सब क्या करते हैं, साथ रहते हैं या अलग, और परिवार मूल रूप से कहाँ का है।

किस क्रम में लिखें

  1. पिता का नाम और व्यवसाय
  2. माता का नाम और व्यवसाय
  3. भाई-बहन (बड़े/छोटे, विवाहित/अविवाहित, क्या करते हैं)
  4. मामा (अगर आपके समाज में लिखा जाता है)
  5. परिवार का प्रकार — संयुक्त या एकल
  6. पारिवारिक मूल्य — पारंपरिक, मध्यम या आधुनिक
  7. मूल निवास
  8. मकान — अपना, किराये का या पैतृक (चाहें तो)

माता-पिता

नाम के साथ "श्री/श्रीमती" और व्यवसाय साफ़ लिखें।

ऐसे नहींऐसे लिखें
पिता: सर्विसपिता: श्री रमेश शर्मा — अनुभाग अधिकारी, भारतीय रेल (सेवानिवृत्त)
माता: हाउसवाइफ़माता: श्रीमती सुनीता शर्मा — गृहिणी
पिता: बिज़नेसपिता: श्री महेश पटेल — मालिक, पटेल टेक्सटाइल्स, सूरत

माता या पिता का देहांत हो गया हो तो सम्मान से लिखें: स्व. श्री रमेश शर्मा।

भाई-बहन

हर एक की एक लाइन — रिश्ता, बड़ा या छोटा, विवाहित या अविवाहित, और क्या करते हैं।

अकेली संतान हों तो लिखें: "इकलौती संतान"। बायोडाटा मेकर में भाई-बहन एक-एक करके जोड़ते हैं, बाकी काम डिज़ाइन ख़ुद कर देता है।

मामा और रिश्तेदार

उत्तर और मध्य भारत के कई परिवारों में मामा का नाम और शहर लिखा जाता है। एक-दो लाइन काफ़ी हैं। रिश्तेदारों के पदों की लंबी सूची दिखावे जैसी लगती है।

परिवार का प्रकार और मूल्य

मूल निवास और मकान

मूल निवास से भाषा, रीति-रिवाज और खान-पान का अंदाज़ा होता है। परिवार कहीं और बस गया हो तो दोनों लिखें: "मूल निवास: बलिया (उ.प्र.); 1998 से पुणे में।"

मकान की जानकारी ज़रूरी नहीं है। बायोडाटा मेकर में यह फ़ील्ड पहले से छिपा रहता है; चाहें तो दिखाएँ।

ख़ास स्थितियाँ

पूरा उदाहरण

पिता: श्री रमेश शर्मा — अनुभाग अधिकारी, भारतीय रेल (सेवानिवृत्त)
माता: श्रीमती सुनीता शर्मा — गृहिणी
भाई-बहन: बड़े भाई — विवाहित, सॉफ़्टवेयर इंजीनियर, बेंगलुरु
मामा: श्री अनिल जोशी, इंदौर
परिवार: एकल परिवार, मध्यम मूल्य
मूल निवास: बलिया (उ.प्र.); पुणे में बसे हैं

सवाल-जवाब

क्या भाई-बहन की तनख़्वाह लिखनी चाहिए?

नहीं। व्यवसाय और शहर काफ़ी है।

मामा का नाम लिखना ज़रूरी है?

सिर्फ़ तब, जब आपके समाज में चलन हो। हिन्दी-भाषी कई परिवारों में यह आम है।

दिवंगत माता-पिता का नाम कैसे लिखें?

नाम से पहले "स्व." लिखें — "स्व. श्री रमेश शर्मा"। अंग्रेज़ी में "Late Shri Ramesh Sharma"।

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