अष्टकूट मिलान में नाड़ी के सबसे ज़्यादा — 8 — अंक हैं। जब लड़के और लड़की की नाड़ी एक ही हो, तो इसके 0 अंक मिलते हैं। इसे नाड़ी दोष कहते हैं, और कई परिवारों में यह गुणों की कुल गिनती से भी ज़्यादा महत्व रखता है।
तीन नाड़ियाँ और उनके नक्षत्र
| नाड़ी | नक्षत्र |
|---|---|
| आदि | अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद |
| मध्य | भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तरा भाद्रपद |
| अंत्य | कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाति, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, रेवती |
दोनों के नक्षत्र एक ही पंक्ति में हों, तो नाड़ी एक है।
परंपरा में नाड़ी दोष को इतना महत्व क्यों
परंपरा में नाड़ी को संतान और सेहत से जोड़कर देखा जाता है। इसीलिए कई परिवार 25+ गुण होने पर भी नाड़ी दोष होने पर रुक जाते हैं।
कब नाड़ी दोष नहीं माना जाता (परिहार)
कई ज्योतिषी इन स्थितियों में दोष कटा हुआ मानते हैं:
- दोनों की राशि एक हो, पर नक्षत्र अलग।
- दोनों का नक्षत्र एक हो, पर राशि अलग।
- नक्षत्र एक हो, पर चरण (पाद) अलग — कुछ परंपराओं में।
- दोनों की राशियों के स्वामी एक हों या आपस में मित्र।
परंपराओं में ये नियम थोड़े अलग हो सकते हैं, इसलिए अंतिम राय किसी जानकार से लें।
नाड़ी दोष और भकूट दोष में फ़र्क
| नाड़ी दोष | भकूट दोष | |
|---|---|---|
| किससे | नक्षत्र की नाड़ी एक होना | राशियों की दूरी 2-12, 5-9 या 6-8 |
| अंक | 8 में से 0 | 7 में से 0 |
| परंपरा में संबंध | संतान, सेहत | परिवार, धन, प्रेम |
अपना मिलान कैसे देखें
नाम से गुण मिलान में "जन्म नक्षत्र से" चुनें और दोनों के जन्म नक्षत्र व राशि डालें। नतीजे में नाड़ी दोष है या नहीं, साफ़ लिखा आएगा।
परिवारों के लिए सलाह
- सिर्फ़ "नाड़ी एक है" सुनकर फ़ैसला न करें — परिहार की स्थितियाँ जाँचें।
- कुंडली मिलान मुलाक़ात से पहले करवाएँ, ताकि बाद में रिश्ता न टूटे।
- डर पैदा करने वाले महँगे "उपायों" से सावधान रहें।