हिन्दू परिवारों में शादी से पहले "कितने गुण मिले?" सबसे आम सवाल है। यह गिनती अष्टकूट मिलान से होती है — आठ कूट (हिस्से), जिनके कुल 36 अंक होते हैं। ये अंक लड़के और लड़की के जन्म नक्षत्र और जन्म राशि (चंद्रमा की स्थिति) से निकलते हैं।
जल्दी अंदाज़ा चाहिए? नाम से गुण मिलान में दोनों के नाम या जन्म नक्षत्र डालें — आठों कूट तुरंत दिखेंगे।
आठ कूट और उनके अंक
| कूट | अंक | क्या देखता है |
|---|---|---|
| वर्ण | 1 | काम और सोच का मेल |
| वश्य | 2 | आपसी आकर्षण, किसकी बात कौन मानेगा |
| तारा | 3 | भाग्य और सेहत |
| योनि | 4 | शारीरिक मेल और स्वभाव |
| ग्रह मैत्री | 5 | मन और विचारों का मेल (राशि स्वामियों की मित्रता) |
| गण | 6 | स्वभाव — देव, मनुष्य, राक्षस |
| भकूट | 7 | परिवार, धन और प्रेम |
| नाड़ी | 8 | संतान और सेहत |
| कुल | 36 |
हर कूट थोड़ा विस्तार से
वर्ण (1 अंक)
राशि के हिसाब से चार वर्ण माने जाते हैं। परंपरा में लड़के का वर्ण लड़की के बराबर या ऊपर हो तो 1 अंक मिलता है।
वश्य (2 अंक)
राशियों को पाँच समूहों (चतुष्पद, मानव, जलचर, वनचर, कीट) में बाँटा गया है। एक ही समूह हो तो पूरे 2 अंक।
तारा (3 अंक)
एक के नक्षत्र से दूसरे के नक्षत्र तक गिनती की जाती है। कुछ गिनतियाँ शुभ, कुछ अशुभ मानी जाती हैं — दोनों दिशाओं से 1½-1½ अंक।
योनि (4 अंक)
हर नक्षत्र का एक पशु-प्रतीक (योनि) है — जैसे अश्व, गज, सर्प। एक ही योनि हो तो 4, शत्रु योनि हो तो 0।
ग्रह मैत्री (5 अंक)
दोनों की राशियों के स्वामी ग्रह आपस में मित्र हैं या शत्रु। एक ही स्वामी या दोनों मित्र हों तो 5।
गण (6 अंक)
नक्षत्र से गण तय होता है — देव, मनुष्य या राक्षस। एक ही गण हो तो 6।
भकूट (7 अंक)
दोनों राशियाँ एक-दूसरे से किस दूरी पर हैं। 2-12, 5-9 या 6-8 की दूरी को भकूट दोष कहते हैं (0 अंक)।
नाड़ी (8 अंक)
सबसे ज़्यादा अंक वाला कूट। नाड़ी तीन हैं — आदि, मध्य, अंत्य। दोनों की एक ही नाड़ी हो तो 0 अंक — नाड़ी दोष। नाड़ी दोष पर पूरा लेख।
कितने गुण अच्छे माने जाते हैं?
| गुण | परंपरा में माना जाता है |
|---|---|
| 18 से कम | कमज़ोर मिलान |
| 18–24 | ठीक मिलान, शादी के लिए मान्य |
| 25–32 | अच्छा मिलान |
| 33–36 | बहुत अच्छा मिलान |
गुणों से आगे क्या देखते हैं
सिर्फ़ गिनती काफ़ी नहीं होती। जानकार पंडित जी ये भी देखते हैं:
- नाड़ी और भकूट दोष — और क्या वे किसी कारण से कट जाते हैं।
- मांगलिक दोष — मंगल की स्थिति, जो अष्टकूट में नहीं गिनी जाती। मांगलिक दोष के सच और भ्रम।
- पूरी कुंडली — दोनों की दशा और बाकी ग्रह।
इसीलिए 28 गुण वाला मिलान भी कभी मना हो सकता है, और 17 वाला कभी ठीक माना जा सकता है।
एक ज़रूरी बात
गुण मिलान एक परंपरा है; हर परिवार इसे अलग महत्व देता है। स्वभाव, मूल्य, आपसी सम्मान और खुली बातचीत — इन्हें गुणों जितना ही महत्व दें। कुंडली मिलान कितना ज़रूरी है पर संतुलित नज़रिया पढ़ें।